रोते रोते हंस लेते हुए,
आंख सेे आंसू चख लेते हूं।
यूं तो ना वजह ह हंसने की अभी,
पर सपनों के आस में मुस्कुरा देते हूं।
कहना तो चाहती हूं तुझसे ए जिन्दगी,
पर क्या करू खुद को खुद में समेट लेते हूं।
नए उजाले के आस में, खुद ही खुद में लड़ती हूं,
तू भी सुन ले ए जिंदगी,सपनों के खातिर में मुस्कुरा देते हूं।।।
